हमारी यात्रा

छह सौ से अधिक वर्षों के लिए भक्त और असहाय महिलाएं अपने आखिरी साल बिताने के लिए वृंदावन आते है । विभिन्न प्रकार की आवधिक दान और धार्मिक गतिविधियों के कारण विधवाएँ बड़ी संख्या में आती हैं; हालाँकि, उनके सिर पर छत की बुनियादी जरूरतों, उनकी प्लेटों में भोजन और उनकी पीठ पर कपड़े के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है, विशेष रूप से दुर्बल और गरीब बुजुर्ग वर्ग के लिए। चिकित्सा सुविधाओं तक उनकी पहुंच बहुत कम है। साथ ही विधवाओं को सामाजिक और सांस्कृतिक कलंक और भेदभाव सहना पड़ता है। सामान्य रूप से समाज बुजुर्गों और विशेष रूप से बुजुर्ग विधवाओं के प्रति उदासीन और प्रतिकूल है, अत: इन्हें खुद को जीवित रखने के लिए मजबूरन भीख मांगकर, विना आदर और सम्मान के साथ जीवन जीना पड़ता है।

हमारे बुजुर्गों और समाज के परित्यक्त वर्ग की इस आवश्यकता को देखते हुए परमहंस योगानंद पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट ने दिसंबर 2014 में वृंदावन में अपना कार्यक्रम को शुरूआत किया और वर्तमान में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से 4000 से अधिक विधवाओं, साधुओं, गरीब महिलाओं और बच्चों की संख्या तक पहुँच चुका है । जिसमे बुनियादी आवश्यकताओ जैसे आवास, भोजन, कपड़े, चिकित्सा और सामाजिक, आर्थिक, मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक कल्याण शामिल है।

परमहंसयोगानंद पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट का केंद्र वृंदावन के समुदायों और उन सभी माताओं और साधुओं के जीवन में "नित्य नवीन आनन्द " का प्रसार करना है, जिनकी हम देखभाल करते हैं, उनकी चेतना बढ़ाकर और उन्हें एक स्वस्थ, खुशहाल और सहयोगी जीवन जीने में मदद करते हैं। हम इसे प्यार, देखभाल और करुणा का वातावरण बना करके प्राप्त करते हैं। एक स्वस्थ जीवन शैली सुनिश्चित करने के लिए, हम विभिन्न सुविचारित गतिविधियों और कार्यक्रमों के माध्यम से उनके शरीर, मन और आत्मा का पोषण करने का विशेष ध्यान रखते हैं। ट्रस्ट हमारे बुजुर्गों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण प्रदान करता है और उन्हें उनके आत्म-मूल्य को खोजने में मदद करता है। हमारी प्रतिबद्ध और समर्पित कर्मियों की टीम सबसे अधिक जरूरतमंद, एकल, निराश्रित और विधवा वृद्धों तक पहुच बनाते है और हमारी व्यापक सामुदायिक सहायता सेवाओं और घर-आधारित देखभाल के माध्यम से उन तक सेवाए पहुचाते है।